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बी माय परफेक्ट ऐंडिंग: अर्पित वगेरिया Be My Perfect Ending by Arpit Vageria

किताब: बी माय परफेक्ट ऐंडिंग  
लेखक: अर्पित वगेरिया
किताब: बी माय परफेक्ट ऐंडिंग  
लेखक: अर्पित वगेरिया

कहानी पूरी फिल्मी है मेरे दोस्त। 

बी माय परफेक्ट ऐंडिंग किताब अर्पित वगेरिया द्वारा लिखी गई है 

अर्पित टीवी के एक जाने-माने लेखक है। किताब में उनके लिखने का तरीका और कहानी में आने वाले मोड़ किसी नाटक की कहानी से कम नहीं। कहानी में प्यार ह,ै रोमांच है, धोखा है, दोस्ती है, टूटे हुए दिल की बातें हैं और थोड़ा भूतिया सीन भी है।

कहानी अरमान और सारा की है। दोनो टीवी की दुनिया से संबंध रखते हैं। सारा एक अनाथ है, जो रिश्तो में बंधने से डरती है। प्यार पाने को बेताब है पर एक बार टूट चूके दिल और प्यार में मिले धोखे से डरती है। दिल जोड़ना चाहती है पर अब किसी रिश्ते में सीरियस नहीं होना चाहती। मगर कहते हैं प्यार आपका कब किस मोड़ पर इंतज़ार कर रहा होगा आप नही जानते। कब आपकी रूह किसी और की हो जायेगी। आप जान भी नही पायेंगे।

सारा को भी जब यह अहसास हुआ कि उसे अरमान से प्यार हो गया है तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

यदि आप बहुत फिल्मी है, रोमांटिक नावल पढ़ना चाहते हैं सस्पेंस पढ़ना चाहते हैं यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए।

जीवन नए साल के साथ शुरू नहीं होता है और न ही इसके साथ समाप्त होता है। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को खो देते हैं जिसके बिना आप बिना नहीं सकते, तो यह भी नहीं रुकता, जीवन बस अंत या शुरू नहीं होता है। जीवन चलता रहता है।आप फिर भी सांस लेते हैं, लोगो की परवाह करते हैं और जिंदा रहते हैं।

“Life doesn't begin with New Year nor does end with it; it doesn't even stop when you lose someone you couldn't stay without. Life simply doesn't end or begin. Life is going on. You Still Breathe, You Still Care, and You Still Live.”

 

हालांकि कहानी में कई बार ये समझ नही आता कि कहानी कौन ब्यान कर रहा है?

अरमान कहानी सूना रहा है, सेंडी, सारा या खुद लेखक।

कहानी कहीं कहीं बिखरी और टूटी लगती है। कहानी कब एक सीन से दूसरे सीन पर पहुंचती हैं पता नही चल पाता 

ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे टी वी एक शहर से दूसरे शहर का सीन पलों में बदल जाता है।

पर यहां सीन देख नही पाते थे और शब्दों में ब्यां नही किया गया कि अब क्हां की बात और रही है।

पर वो कहते है ना अंत भला तो सब भला। हालांकि ये यह परफेक्ट एंडिंग नहीं है, पर अच्छी एंडिंग जरूर है।

किताबों कि दुनिया से

रूचिका सचदेवा

जरूरी सूचना: मैं आलोचक या रिवयुअर नही ब्लाॅगर हुं जो विचार सांझा करती हुं। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई मकसद नही। मैं केवल शब्दों के पीछे छुपी निशब्द भावनाओं को पढ़ने की कोशिश कर रही हुं।


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